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कोरोनावायरस का इलाज संभव

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नमस्कार दोस्तों में लव कुश आपका स्वागत करता हूं। कोरोनावायरस एक बहुत ही भयंकर बीमारी है जो दिन-ब-दिन फैलती ही जा रही है और इसका इलाज किसी भी डॉक्टर के पास नहीं है और सभी देशों में लगातार विकराल रूप लेती जा रही है। मगर इसका इलाज हो सकता है अगर हम परमात्मा की सद्भक्ति करें और आध्यात्मिक तरीके से इस बीमारी से छुटकारा पा सकते हैं हमारे शास्त्रों में भयंकर से भयंकर रोग को परमात्मा नष्ट कर सकते हैं इसका प्रमाण है हमारे शास्त्र भी देते हैं 👇👇👇 पवित्र वेद भी प्रमाण देते हैं कि सबका मालिक कबीर परमात्मा सम्पूर्ण शांति दायक है - यजुर्वेद अध्याय 5 मंत्र 32 सर्व शक्तिमान सबका मालिक एक परमेश्वर कबीर ही है" पूर्ण परमात्मा आयु बढ़ा सकता है और कोई भी रोग को नष्ट कर सकता है। - ऋग्वेद अतः हमें अपने शास्त्रों के अनुसार पूर्ण गुरु बना कर एक ही परमात्मा की सत भक्ति करने चाहिए जिससे हम किसी भी बीमारी से छुटकारा पा सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए जरूर देखें जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के मंगल प्रवचन शाम 7:30 से 8:30 साधना चैनल और 8:30 से 9:30 तक ईश्वर टीवी पर यह अवश्य पढ़िए जीन...

"अजामेल के उद्धार की कथा’’

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सच्ची रोचक कथा अवश्य पढ़िए               "अजामेल के उद्धार की कथा’’ काशी शहर में एक अजामेल नामक ब्राह्मण शराब पीता था। वैश्या के पास जाता था। वैश्या का नाम मैनका था, बहुत सुंदर थी। परिवार तथा समाज के समझाने पर भी अजामेल नहीं माना तो उन दोनों को नगर से निकाल दिया। वे उसी शहर से एक मील (1ण्7 कि. मी.) दूर वन में कुटिया बनाकर रहने लगे। दोनों ने विवाह कर लिया। अजामेल स्वयं शराब तैयार करता था। जंगल से जानवर मारकर लाए और मौज-मस्ती करता था। विशेष :- अजामेल पूर्व जन्म में विष्णु जी का परम भक्त था। ब्रह्मचर्य का पूर्ण पालन करता था। साधक समाज में पूरी इज्जत थी। बचपन से ही घर त्यागकर साधुओं में रहताथा। वैश्या भी पूर्व जन्म में विष्णु जी की परम भक्त थी। ब्रह्मचर्य का पूर्ण पालन करती थी। पर पुरूष की ओर कभी दोष दृष्टि से नहीं देखती थी। इस लक्षण से साधक समाज में विशेष सम्मान था। साधकों में ध्यान समाधि लगाने का विशेष प्रचलन है जो केवल काल प्रेरणा है। हठ योग है जो गीता तथा वेदों में मना किया है। एक दिन श्याम सुंदर (अजामेल का पूर्व जन्म का नाम) लेटकर समा...

ब्रह्मा विष्णु महेश नाशवान है

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श्रीमद् देवी भागवत पुराण तृतीय स्कंद 3, आद्या 4, पृष्ठ सं। 10, श्लोक 42 ब्रह्मा अहम् महेश्वरह ते ते प्रभुत्सर्वे वमनि नं यदा तु नित्यं, कीं सुरे शतम् प्रमुक्खं च नित्यं नित्यं त्वमेव ज्ञानप्रतिष्ठ पुराण (४२) Mother ओह माँ! ब्रह्मा, मैं, (विष्णु), और शिव केवल आपके प्रभाव से जन्म लेते हैं, हम शाश्वत / अमर नहीं हैं, फिर अन्य इंद्र आदि देवता कैसे अनन्त हो सकते हैं। केवल आप अमर हैं, प्राकृत और सनातनी देवी हैं। श्रीमद् देवी भागवत पुराण, पृष्ठ ११-१२, अधाय ५, श्लोक Bhag यादि दयद्राम्ना न सादम्बिके कथम्हाम् विहितं च तमोगुणं कमलजश्च राजोगुणसंभवम् सुविहितं किमु सत्वगुणो हरिः (8) भगवान शंकर ने कहा , “हे माता! यदि आप हमारे प्रति दयालु हैं तो आपने मुझे तमोगुण क्यों बनाया, आपने ब्रह्मा को क्यों बनाया, जो कमल से उत्पन्न हुए हैं, राजगंज, और आपने विष्णु, सतगुण क्यों बनाया? ”अर्थात आपने हमें दुष्टों के कुकृत्यों में क्यों उलझाया? जन्म और जीवों की मृत्यु? श्रीमद् देवी भागवत पुराण तीसरा स्कंद, आद्या 1-3, पृष्ठ संख्या 1919 भगवान विष्णु जी ने श्री ब्रह्मा जी और श्री शिव जी से कहा कि 'दुर्गा हम तीनों की म...